कंगनी (Foxtail Millet) plant growing in a field
छोटा मिलेटग्लूटेन-फ्रीछिलके वाला अनाज

कंगनी (Foxtail Millet)

Setaria italica

कंगनी / थिनाई

सबसे पुराने उगाए गए मिलेट में से एक — प्रोटीन और आयरन से भरपूर, चावल का विकल्प

भारतीय भाषाओं में नाम

LanguageName
Hindiकंगनी (Kangni)
Tamilதினை (Thinai)
Teluguకొర్రలు (Korralu)
Kannadaನವಣೆ (Navane)
Malayalamതിന (Thina)
Marathiकाँग / राळा (Kang / Rala)
Bengaliকাওন (Kaon)
Gujaratiકાંગ (Kang)
Odiaକଙ୍ଗୁ (Kangu)
Punjabiਕੰਗਣੀ (Kangni)
Sanskritप्रियंगु (Priyangu)

पोषण प्रोफाइल

प्रति 100 ग्राम. स्रोत: ICMR-NIN IFCT 2017 — Indian Food Composition Tables, National Institute of Nutrition, Hyderabad

Calories

331kcal

Protein

12.3g

Fiber

8g

Calcium

31mg

Iron

2.8mg

Glycemic Index

50(low)

पोषक तत्वमात्रा प्रति 100 ग्राम
कैलोरी331 kcal
प्रोटीन12.3 g
वसा (फैट)4.3 g
कार्बोहाइड्रेट60.9 g
फाइबर8 g
कैल्शियम31 mg
आयरन2.8 mg
ज़िंक2.4 mg
फॉस्फोरस290 mg
मैग्नीशियम81 mg
पोटैशियम250 mg

कंगनी (Foxtail Millet) vs. सफ़ेद चावल

नीचे दी गई स्वास्थ्य जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और यह चिकित्सा सलाह नहीं है। आहार में बदलाव करने से पहले किसी स्वास्थ्य पेशेवर से परामर्श करें। पूरा अस्वीकरण पढ़ें

सेहत के फायदे

ज़्यादा प्रोटीन

पूरी तरह प्रमाणित

कंगनी में प्रति 100g में 12.3g प्रोटीन होता है, जो मिलेट में सबसे ज़्यादा में से एक है। यह शाकाहारियों के लिए प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है।

स्रोत: ICMR-NIN IFCT 2017

कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स — डायबिटीज़ वालों के लिए अच्छा

शोध द्वारा समर्थित

लगभग 50 के GI के साथ, कंगनी में ग्लूकोज़ धीरे-धीरे रिलीज़ होता है, जो इसे डायबिटीज़ वालों के लिए एक उपयुक्त अनाज बनाता है।

स्रोत: International Journal of Diabetes in Developing Countries

डाइटरी फ़ाइबर से भरपूर

पूरी तरह प्रमाणित

प्रति 100g में 8.0g फ़ाइबर होता है, जो पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, पेट भरा रखता है और कोलेस्ट्रॉल को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है।

स्रोत: ICMR-NIN IFCT 2017

विटामिन B का अच्छा स्रोत

शोध द्वारा समर्थित

कंगनी विटामिन B-कॉम्प्लेक्स का अच्छा स्रोत है, जिसमें थायमिन और नियासिन शामिल हैं, जो ऊर्जा चयापचय और तंत्रिका तंत्र के कामकाज के लिए ज़रूरी हैं।

स्रोत: Journal of Food Science and Technology

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)

कषाय (कसैला), मधुर (मीठा)

वीर्य (शक्ति)

उष्ण (गरम)

विपाक (पचने के बाद)

कटु (तीखा)

गुण (गुणवत्ता)

लघु (हल्का), रूक्ष (सूखा)

दोष प्रभाव

वात

बढ़ाता है

पित्त

सामान्य

कफ

कम करता है

चिकित्सीय उपयोग

  • हल्के और सूखे गुणों के कारण वज़न प्रबंधन में उपयोगी
  • पाचन अग्नि (Agni) को बढ़ाता है
  • कफ़ संबंधी समस्याओं जैसे जमाव में लाभकारी
  • प्रसव के बाद रिकवरी के आहार में पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है

शास्त्रीय संदर्भ: अष्टांग हृदय

मना करने के कारण

  • वात थोड़ा बढ़ा सकता है — संतुलन के लिए घी या तेल मिलाएँ
  • सूखी त्वचा की समस्या वाले लोगों के लिए ज़्यादा मात्रा में अनुशंसित नहीं

Ayurvedic information presented here is derived from classical texts for educational purposes. It is not medical advice. Always consult a qualified Ayurvedic practitioner or healthcare provider before making dietary changes based on Ayurvedic principles.

अस्वीकरण

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कैसे पकाएँ कंगनी (Foxtail Millet)

पानी का अनुपात

1:2.5

भिगोने का समय

30 मिनट

पकाने का समय

15-20 मिनट

इसका सबसे अच्छा विकल्प

चावल

बनावट

फूली हुई, चावल जैसी

स्वाद

नट जैसा (nutty), हल्का मीठा

पकाने के टिप्स

  • 1.अच्छे नतीजों के लिए अच्छी तरह धोकर 30 मिनट भिगोएँ
  • 2.चावल की तरह पकाएँ — यह बहुत अच्छे से फूलता है
  • 3.बढ़िया उपमा, पुलाव और पोंगल बनता है
  • 4.मीठे व्यंजनों जैसे पायसम (खीर) में भी इस्तेमाल कर सकते हैं
  • 5.पकाने से पहले हल्का सूखा भूनें — ज़्यादा स्वादिष्ट बनेगा

खेती

प्रमुख राज्य (India)

आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान, मध्य प्रदेश

वैश्विक क्षेत्र

चीन, दक्षिण-पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया, यूरोप (ऐतिहासिक)

उगाने का मौसम

खरीफ़ (जून-अक्टूबर)

पानी की ज़रूरत

300-400mm बारिश

मिट्टी का प्रकार

हल्की रेतीली दोमट से मध्यम दोमट मिट्टी; बेहद सूखा-सहनशील

कटाई के दिन

75-90 दिन

इतिहास

उत्पत्ति का क्षेत्र

उत्तरी चीन (सिशान पुरातत्व स्थल)

खेती की शुरुआत का काल

लगभग 8700 साल पहले (~6700 ईसा पूर्व)

पुरातात्विक प्रमाण

उत्तरी चीन के सिशान पुरातत्व स्थल से लगभग 8700 साल पुराने अवशेष मिले हैं, जो इसे दुनिया की सबसे पुरानी उगाई गई फ़सलों में से एक बनाते हैं।

फैलाव का तरीका

उत्तरी चीन में पालतू बनाया गया और मध्य एशिया के व्यापार मार्गों से पश्चिम की ओर भारत, मध्य पूर्व और यूरोप तक फैला।

सांस्कृतिक महत्व

कंगनी दक्षिण भारतीय भोजन में सांस्कृतिक महत्व रखती है, ख़ासकर तमिलनाडु (थिनाई) और आंध्र प्रदेश (कोर्रालु) में। इसका उपयोग पारंपरिक त्योहारी व्यंजनों में होता है और प्राचीन संगम तमिल साहित्य में इसका उल्लेख मिलता है।

साइड इफेक्ट्स और सावधानियाँ

गोइट्रोजन की मौजूदगी

डॉक्टर से मिलें

गोइट्रोजेनिक यौगिकों के कारण बहुत ज़्यादा खाने पर थायरॉइड की समस्या हो सकती है। थायरॉइड रोगियों को सीमित मात्रा में खाना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

प्रोसेसिंग की ज़रूरत

हल्का

छिलके वाली क़िस्म को पकाने से पहले सही ढंग से छिलका उतारना/प्रोसेस करना ज़रूरी है। अधूरी प्रोसेसिंग वाला दाना पचने में मुश्किल हो सकता है।

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स्रोत

  1. Longvah T, Ananthan R, Bhaskarachary K, Venkaiah K (2017). Indian Food Composition Tables 2017.
  2. Murthy KRS (1991). Ashtanga Hridaya (English Translation).

अस्वीकरण: यह सामग्री AI की मदद से बनाई गई है और प्रकाशित शोध, सरकारी स्रोतों, और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित है। हम सटीकता के लिए पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन चिकित्सा सलाह के लिए हमेशा किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मिलें।