कुटकी अंबली (समलु / सामै अंबली)
पाँचों सिरिधान्य मिलेट में कुटकी सबसे हल्का अंबली बनाती है। तेलुगु में समलु और तमिल में सामै कहलाने वाले इसके नन्हे दाने कुछ ही मिनटों में पक जाते हैं और नरम व हल्के चिपचिपे हो जाते हैं, जिससे खट्टा किया दलिया दानेदार नहीं बल्कि चिकना बनता है। आंध्र और कर्नाटक के घरों में इसे आम तौर पर सादा ही रखा जाता है: नमक, थोड़ी छाछ और बस इतना ही। यह दिन के किसी भी समय हल्का और साफ़ पिया जाता है।
तैयारी का समय
30 मिनट भिगोना + रात भर फर्मेंटेशन
पकाने का समय
15 मिनट
कितने लोगों के लिए
4
कठिनाई
आसान
सामग्री
- कुटकी (समलु) — 1/2 कप (95 ग्राम)
- पानी — 4 कप, पतला करने के लिए अतिरिक्त
- छाछ (या पतला दही) — 1 कप
- नमक — स्वादानुसार (परोसते समय डालें)
- छोटा प्याज़, बारीक कटा — 1 (परोसने के लिए)(वैकल्पिक)
- करी पत्ता — 1 टहनी (परोसने के लिए)(वैकल्पिक)
- हरी मिर्च, बारीक कटी — 1 (परोसने के लिए)(वैकल्पिक)
बनाने का तरीका
- 1
कुटकी को अच्छी तरह धोएँ, 30 मिनट भिगोएँ, फिर पानी निकाल दें।
- 2
मिलेट को 4 कप पानी में डालें और उबाल लाएँ। धीमी आँच पर 12 से 15 मिनट पकाएँ, जब तक दाने नरम और थोड़े चिपचिपे हो जाएँ।
- 3
कमरे के तापमान तक ठंडा करें और मिट्टी के बर्तन या काँच के जार में डालें, अभी नमक छोड़ दें।
- 4
कपड़े से ढीला ढँकें और रात भर, 8 से 10 घंटे फर्मेंट होने दें, जब तक हल्का खट्टा न हो जाए।
- 5
सुबह दानों को हल्का मसलें, फिर छाछ और पेय बनाने भर ठंडा पानी मिलाकर व्हिस्क करें।
- 6
नमक डालें और चाहें तो प्याज़, करी पत्ता और हरी मिर्च डालकर पूरा करें।
- 7
ठंडा और बिना गर्म किए परोसें, ताकि फर्मेंटेशन जीवित रहे।
टिप्स
- •कुटकी रखे रहने पर गाढ़ी होती जाती है, इसलिए परोसने से ठीक पहले इसे पतला करने के लिए थोड़ी अतिरिक्त छाछ या पानी अलग रख लें।
- •दानों को तब तक धोएँ जब तक पानी साफ़ न निकले। इससे ऊपरी स्टार्च निकल जाता है और साफ़ खट्टापन मिलता है।
- •भिगोने और पकाने का समय शाम के लिए रखें ताकि अंबली रात भर फर्मेंट हो और सुबह तक तैयार रहे।